100 साल पुरानी दर्द भरी गजल को सुनते ही पसीज जाता है दिल, Ghulam Ali ने दी थी आवाज

बॉलीवुड में म्यूजिक लवर्स के लिए बहुत कुछ है। दर्दभरे गानों से लेकर रोमांटिक सॉन्ग और खूबसूरत मेलोडी तक। लेकिन इस खजाने से अलग कोई और म्यूजिक थैरेपी है जो म्यूजिक लवर्स को भाती है तो वो है गजल। गजल की एक खास बात ये है कि भले ही यह कितनी ही पुरानी है इसके बोल अच्छे हों तो सीधे म्यूजिक लवर्स के दिल पर लगते हैं।
आज हम एक ऐसी ही गजल के बारे में बात करने जा रहे हैं जो है तो 100 साल पुरानी लेकिन आज भी सुनने में उतनी ही खूबसूरत और मेलोडियस लगती है। इतना ही नहीं यह गजल इतनी पॉपुलर हुई कि इसे एक बॉलीवुड फिल्म में फिर से रीक्रिएट किया गया।
‘धुरंधर 2’ में भी सुनाई दी धुन
हाल फिलहाल में जब ब्लॉकबस्टर ‘धुरंधर 2’ (Dhurandhar 2) में भी इसकी धुन सुनाई दी तो फिर से गजल की यादें ताजा हो गईं। उस क्लिप को शेयर करते हुए लोगों ने गजल को बखूबी तरीके से इस्तेमाल करने के लिए मेकर्स की सराहना की।
कौन सी है ये गजल?
जिस गजल की हम बात कर रहे हैं उसके बोल हैं- चुपके चुपके रात दिन (Chupke Chupke Raat Din) है जिसे स्वतंत्रता सेनानी और महान शायर मौलाना हसरत मोहानी (Hasrat Mohani) ने लिखा था। हालांकि इसके लिखे जाने के वक्त या तारीख का कोई सटीक प्रमाण नहीं है लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक इसे 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में लिखा गया था।
गुलाम अली ने दी आवाज
हसरत मोहानी द्वारा लिखी गई इस गजल को गुलाम अली (Ghulam Ali) ने 1982 में बी.आर. चोपड़ा की मशहूर फिल्म निकाह (Nikaah) के लिए गाया था। तब यह गजल और भी ज्यादा मशहूर हो गई। इसके अलावा इसे मशहूर गजल गायक जगजीत सिंह (Jagjit Singh) ने भी आवाज दी थी।
‘धुरंधर 2’ में सुनाई दी धुन
हाल ही में इस गजल को आदित्य धर (Aditya Dhar) की धुरंधर 2 में भी इस्तेमाल किया गया। एक सीन में जब हम्जा (Ranveer Singh) और आलम भाई (Gaurav Gera) साथ में चाय पीते हुए बात करते हैं तो बैकग्राउंड में यह गजल सुनाई देती है।
चुपके चुपके रात दिन, एक ऐसी गजल है जो पुरानी होकर भी नए जमाने के म्यूजिक लवर्स को भा रही है और आगे भी सालों तक इसके बोल आशिकों के दिलों को छूते रहेंगे।




