अंबुबाची मेला 2026 समापन: 3 दिनों के अनुष्ठान के बाद कामाख्या मंदिर के खुले कपाट

असम के गुवाहटी में निलांचल पहाड़ पर स्थित मां कामाख्या का पवित्र मंदिर, जहां बीते 22 जून की रात को मंदिर के कपाट तीन दिनों के लिए बंद कर दिए गए थे। इसके पीछे का कारण माता के राजस्वला होने का समय था। हर साल जब मंदिर तीन दिनों के लिए बंद होता है, तो बाहर अंबुबाची मेले की शुरुआत होती है।

आज यानी 26 जून 2026 को शुद्धिकरण अनुष्ठान के बाद मंदिर के कपाट एक बार फिर से भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं। हर साल कामाख्या मंदिर में माता के दर्शन और पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होती है।

अंबुबाची मेले का महत्व

मां कामाख्या के मंदिर में अंबुबाची मेला साल में केवल एक बार जून के महीने में ही लगता है। इस दौरान श्रद्धालु से लेकर संत-साधक और तंत्रिक बड़ी संख्या में मां के धाम के बाहर इक्ट्ठा होते हैं। यह मेला असम के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में शामिल है।

अंबुबाची मेले के दौरान मंदिर के कपाट 3 दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं। किसी को भी इन तीन दिनों में मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होती है। माना जाता है कि, यह समय मां के मासिक धर्म और आराम करने का होता है। इस दौरान मंदिर में गर्भगृह में मौजूद शिला के सामने सफेद रंग का कपड़ा बिछाकर रख दिया जाता है।

अंबुबाची मेला समाप्त होने के बाद क्या अनुष्ठान किया जाता है?

अंबुबाची मेला खत्म होने के बाद जब मंदिर का कपाट फिर से खोला जाता है, तो पहला दर्शन अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि, पहले दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं पर मां कामाख्या की विशेष कृपा रहती है। मेला खत्म होने के बाद कुछ जरूरी काम किए जाते हैं। इस दौरान मां कामाख्य का स्नान कराने के साथ दैनिक यज्ञ, पूजा, हवन एक बार फिर से शुरू किया जाता है।

मां कामाख्या को ताजे फल-फूल, मिठाइयां और खास तरह का भोग अर्पित किया जाता है। इसके अलावा श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में मां कामाख्या का राजस्वला वाला लाल कपड़ा दिया जाता है।

प्रसाद के रूप में दिया जाता है पवित्र अंगवस्त्र

अंबुबाची मेले समाप्त होने के बाद जब मंदिर के कपाट एक बार फिर से खुलते हैं, तो श्रद्धालुओं को मां अत्यंत पवित्र अंगोदक जिसे अंगवस्त्र भी कहते हैं, बांटा जाता है।

ये वही कपड़ा होता है, जिसे मंदिर के कपाट बंद करने के दौरान गर्भगृह में शिला के सामने बिछाया जाता है। 3 दिन बाद जब मंदिर के कपाट खुलते हैं, तो यह कपड़ा पूरी तरह से लाल हो जाता है।

मां कामाख्या शक्ति उपासना का केंद्र

मां कामाख्या का मंदिर शक्ति उपासना करने के लिए प्रमुख माना जाता है। इस मंदिर में देवी की कोई भी मूर्ति स्थापित नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक शिला को पूजा जाता है, जिसे योनिकुंड के नाम से जाते हैं और जिससे लगातार जल बहता है।

माना जाता है कि, इसी जगह पर मां सती का योनि हिस्सा गिरा था, जिसकी वजह से यह जगह 51 शक्तिपीठ के रूप में काफी चर्चित है।

Related Articles

Back to top button